पलाश वेंडिंग मशीन एवं आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेसवे योजना का शुभारंभ

वाहनों को हरी झंडी दिखा कर रवाना करते अधिकारी।

रांची | झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जेएलपीएस) के तत्वावधान में उप विकास आयुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने पलाश वेंडिंग मशीन एवं आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेसवे योजना का शुभारंभ किया।इस अवसर पर उन्होंने दो मालवाहक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर योजना का औपचारिक उद्घाटन किया। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी आजीविका को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पलाश वेंडिंग मशीन और आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेसवे योजना झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में भी योगदान देगी।

पलाश वेंडिंग मशीन: ग्रामीण उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने की नई पहल

पलाश वेंडिंग मशीन योजना का उद्देश्य स्वयं सहायता समूह की दीदियों द्वारा उत्पादित कृषि और अन्य उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँचाना है। इस नवाचार के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादित ताजा और गुणवत्तापूर्ण सामग्री को शहरी बाजारों तक आसानी से पहुँचाया जा सकेगा। यह न केवल दीदियों की आय में वृद्धि करेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी ताजा और स्थानीय उत्पाद उपलब्ध कराएगा।

आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेसवे योजना: सुदूर क्षेत्रों को जोड़ने का प्रयास 

आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेसवे योजना के तहत सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों को यातायात सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के अंतर्गत दो मालवाहक वाहनों का शुभारंभ किया गया, जो ग्रामीण उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने और सखी मंडलों को नए आजीविका अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अभिनव प्रयास है।

ये थे उपस्थित

इस अवसर पर निदेशक डीआरडीए सुदर्शन मुर्मू, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मनरेगा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक निशिकांत नीरज, जिला प्रबंधक (स्किल), डीएमएमयूके सभी स्टाफ, तामाड़ प्रखंड के बीपीएम, मरधान और तामाड़ आजीविका संकुल संगठनों की दीदियाँ और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। सभी ने इस पहल की सराहना की और इसे ग्रामीण विकास की दिशा में एक मील का पत्थर बताया।

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