2012 में तीन परिवार से शुरू हुआ जिलिंगोड़ा में छठ पूजा, आज तीन हजार परिवार करता है छठ

जिलिंगोड़ा छठ घाट में पूजा करते श्रद्धालु

सरायकेला | लोकआस्था का महापर्व छठ पूजा में लोगों की ऐसी आस्था की जिलिंगोड़ा छठ घाट को कोल्हान में एक अलग ही पहचान मिल चुकी है। जानकारी के मुताबिक एलबीएसएम रोड हारहरगुट्टू निवासी आनंद श्रीवास्तव और क्षेत्र के अन्य दो परिवार वर्ष 2012 में पहली बार जिलिंगोड़ा पूजा करने पहुंचे। उस वक्त झामुमो नेता महावीर मुर्मू ने दोस्ती निभाते हुए पेट्रोमेक्स की व्यवस्था कर उन परिवारों को छठ घाट में पूजा करने में सहायता की।

वर्ष 2014 में कमिटी का गठन

2012 से उस घाट में पूजा करने के बाद धीरे – धीरे लोग पूजा करने के लिए जुटे और वर्ष 2014 में जिलिंगोड़ा छठ घाट समिति का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष आनंद श्रीवास्तव को बनाया गया। उसके बाद से लगातार छठव्रतियों की संख्या बढ़ती रही और शांतिपूर्ण ढंग से पूजा होता रहा।

पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन का क्षेत्र

मालूम हो कि यह छठ घाट सरायकेला से लगातार विधायक रहे पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन का क्षेत्र है। उनके दिशा-निर्देश पर हर वर्ष पूजा की भव्यता में सहयोग किया जाता है। इस वर्ष लगभग तीन हजार परिवारों ने छठ घाट में शांतिपूर्ण ढंग से पूजा-अर्चना की।

अनूप सिंह का अनोखा जज्बा

प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार कमिटी में एक सदस्य अनूप सिंह, जिसका नाम छठ घाट पर मौजूद सभी के जुबान पर था। ट्रांसपोर्टर भैया के नाम से प्रसिद्ध इस युवा का काम बुजुर्गों को पार्किंग से छठ घाट तक पहुंचना था। लगभग 500 मीटर की दूरी में ये युवा दर्जनों बुजुर्गों को पार्किंग से छठ घाट तक पहुंचता है। लोगों में आश्चर्य इस बात का है की शारीरिक रूप से विकलांग यह युवा अपनी स्कूटी से पथरीले और संकीर्ण रास्ते से बुजुर्गों को छठ घाट तक पहुंचता है और पूजा खत्म होने के बाद वापस पार्किंग छोड़ता है।

इनका रहता है सहयोग

आनंद श्रीवास्तव, अरविंद सिंह, सोनू मिश्रा, संतोष कुमार, विष्णु सिंह, धनंजय सिंह, अजय सिंह, मुन्ना प्रसाद, अनूप सिंह, रामबाबू पंडित, विनोद शर्मा, संतोष यादव, विजय सिंह, अजय बारला, छोटू शर्मा, बबलू सिंह, रामजी ठठेरा, सावन मुखी, राजेश मुखी, सनी महतो, गुल्लू पत्रों, टिंकू सिंह, प्रीतम, डेविड, आशीष रंजन, परिमल कुमार के सहायता से लगातार दस दिनों के मेहनत के बात छठव्रतियों के लिए घाट तैयार किया जाता है पूजा खत्म होने तक वहां उपस्थित रहते है।

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