स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन में नहीं दिखने चाहिए आवारा कुत्ते : सुप्रीम कोर्ट
- सख्ती से पालन नहीं होने पर अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
- शुक्रवार को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले में फ़ैसला सुनाया।

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश दिया कि वे सरकारी और निजी संस्थानों की पहचान करें, जिनमें अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, सार्वजनिक खेल परिसर, रेलवे स्टेशन शामिल हैं। उन्हें इस तरह घेर दें कि आवारा कुत्ते अंदर न आ सकें। कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों को ऐसे परिसरों से मौजूदा आवारा कुत्तों को हटाकर उनकी नसबंदी करानी होगी। इसके बाद उन्हें डॉग शेल्टर में भेजना होगा।
लाइव लॉ के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर शैक्षिक संस्थान, अस्पताल, स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स, बस स्टैंड, डिपो, रेलवे स्टेशनों इत्यादि की अच्छी तरह से बाड़बंदी ज़रूरी है, ताकि आवारा कुत्तों को घुसने से रोका जा सके। बेंच ने कहा कि ये स्थानीय प्रशासन की ज़िम्मेदारी है कि वे आवारा कुत्तों को इस तरह की जगहों से हटाए और टीकाकरण, नसबंदी के बाद उन्हें एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स के अनुरूप ही कुत्तों के लिए बने शेल्टर में रखें। हालांकि कोर्ट का लिखित आदेश अभी जारी नहीं हुआ है।

आदेश के मुख्य बिन्दु
सार्वजनिक स्थानों से हटाना:
- स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और बस/रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए।
शेल्टर और रिहाई:
- पकड़े गए कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया जाए।
- नसबंदी और टीकाकरण के बाद शेल्टर होम में रखा जाएगा।
- कोर्ट ने समय-समय पर निरीक्षण करने को भी कहा, ताकि यहां कुत्ते अपना घर न बना सकें।
अन्य निर्देश
- राजमार्गों से आवारा मवेशियों को हटाने के लिए गश्ती दल गठित किए जाएं।
- अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया है।
- सार्वजनिक स्थानों पर बाड़ लगाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आवारा कुत्ते वहां न पहुंच सकें।



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