बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही घाटशिला में भी भस्मासुरों की हार हुई : डॉ. सूरज मंडल
- घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में अपनी ही पार्टी के हार पर बोले सूरज मंडल
- पूर्व सांसद डॉ. सूरज मंडल ने कहा कि परिपक्व मतदाताओं ने पढ़ाया सभी को पाठ

रांची | अखिल भारतीय संपूर्ण क्रांति राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद, पूर्व जैक उपाध्यक्ष, झारखण्ड मजदूर मोर्चा के अध्यक्ष और भाजपा नेता डॉ. सूरज मंडल ने कहा है कि न केवल बिहार विधानसभा चुनाव बल्कि घाटशिला के उपचुनाव में भी वैसे सभी भस्मासुरों की हार हुई है जिन्होंने राजनीति के सभी नीति-सिद्धांत, ईमानदारी, नैतिकता और मर्यादाओं की धज्जियाँ उड़ा दी है। उन्होंने कहा कि एक भस्मासुर के रूप में लालू यादव की जबरदस्त हार हुई है और इसके कारणों का पता उन्हें स्वयं ही लगाना चाहिये। शुक्रवार को मतगणना के पश्चात उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि अपने संपूर्ण राजनीतिक जीवन में लालू प्रसाद ने न केवल भ्रष्टाचार, भाई-भतीजाबाद, अनैतिकता, गुंडागर्दी और अन्य सभी गलत बातों को प्रोत्साहित किया बल्कि उन्होंने सामान्य राजनीतिक मर्यादा का भी पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि एक समय झारखण्ड मुक्ति मोर्चा और उनके स्वयं के पुरजोर समर्थन के बलबूते ही लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन समय आने पर उन्होंने किसी को भी नहीं छोड़ा और सभी की पीठ में छुरा भोंक दिया जिसका खामियाजा आज उन्हें अपनी सबसे जबरदस्त हार के रूप में चुकाना पड़ा है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की जीत को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जबरदस्त जीत बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सफल नेतृत्व में अब बिहार में डबल इंजन की एक वैसी सरकार होगी जिसके कारण बिहार अपनी पुरानी गरिमा और वैभव को प्राप्त कर सकेगा साथ ही विकास की गति और भी तेज होगी।
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने नहीं मानी मेरी बात इसलिए पार्टी को हार का सामना करना पड़ा
डाॅ.मंडल डल ने कहा कि यदि झारखण्ड विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उनकी बात को मान लेता तो झारखण्ड में भी जबरदस्त बहुमत के साथ भाजपा सरकार ही बनती न कि झामुमो-कांग्रेस की। झारखण्ड के घाटशिला उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी की हुई हार को उन्होंने एक गलत उम्मीदवार की हार करार देते हुए कहा कि घाटशिला में भाजपा उम्मीदवार नहीं बल्कि वहाँ एक वैसे प्रत्याशी की शिकस्त हुई है जिसके प्रति ना तो जनता में जन समर्थन है और न ही जिसकी कोई राजनीतिक साख बची है।



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