जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं होगा तब तक आरक्षित कोटे से नए दाखिले नहीं : निजी स्कूल
स्कूलों को हर हाल में नया नामांकन लेना होगा, नहीं तो होगी कार्रवाई : डीएसई
- निजी स्कूलों को पिछले 5 वर्षों से नहीं मिला आरक्षित कोटे का ₹10 करोड़ बकाया राशि। स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग आमने-सामने

जमशेदपुर | शिक्षा का अधिकार (आरटीई) नियम के तहत आरक्षित कोटे की सीटों पर हुए नामांकन की फीस का भुगतान नहीं होने को लेकर शहर के निजी स्कूलों और शिक्षा विभाग के बीच खुलकर आमना सामना हुआ। निजी स्कूलों ने स्पष्ट कहा कि जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं होगा तब तक आरक्षित कोटे से नए दाखिले नहीं लिए जाएंगे, वही जिले के शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) आशीष पांडे ने कहा कि स्कूलों को हर हाल में नया नामांकन लेना होगा।
उक्त मामले को लेकर एसोसिएशन ऑफ झारखंड यूनाइटेड प्राइवेट एजुकेशन इंस्टीट्यूशन के नेतृत्व में बैठक शुक्रवार को नरभेराम हंसराज इंग्लिश स्कूल में हुई। एसोसिएशन के चेयरमैन नकुल कमानी ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों को पिछले पांच वर्षों से लगभग 10 करोड़ रुपए आरक्षित कोटे के फीस का भुगतान नहीं किया गया है। जिससे कई निजी स्कूलों की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित है। बैठक में एसोसिएशन के उपाध्यक्ष ज्ञान तनेजा, सचिव श्रीकांत नायर समेत अन्य उपस्थित थे।
एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग के सामने रखी मांग
– 10 वर्षों में 10% से अधिक फीस वृद्धि की अनुमति।
– स्कूल का कैचमेंट एरिया 6 किमी से घटकर एक किमी किया जाए।
– आरटीई अधिनियम के तहत निर्धारित प्रति छात्र का फीस ₹425 से बढ़ाकर ₹1500 किया जाए।
– मिशनरी और अल्पसंख्यक स्कूल भी आरटीई के दायरे में लाए जाए।
आरटीई अधिनियम के तहत लीज या सबलीज की जगह पर संचालित स्कूल को भुगतान का नियम नहीं है। निजी स्कूलों के पास फिलहाल ऐसा कोई विकल्प नहीं है कि वह तय कर सके कि आरक्षित सीटों पर दाखिला लेंगे या नहीं। निजी स्कूल प्रबंधन को हर हाल में आरक्षित कोटे की सीटों पर दाखिला लेना होगा, ऐसा नहीं करने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में स्कूल कोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र है।
आशीष पाण्डेय, जिला शिक्षा पदाधिकारी, पूर्वी सिंहभूम।



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