कभी भी दोहरा सकता है 1995 की जहरीली शराब कांड, शराब की जगह बेचे जा रहे जहर

  • उत्पाद विभाग की तत्परता से बिरसानगर में हुआ अवैध शराब फैक्ट्री का उद्भेदन
  • अधिकृत दुकानों से भी सोच समझकर खरीदे शराब
अवैध शराब फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान जब्त सामान के साथ अधिकारी।

जमशेदपुर|उत्पाद विभाग जमशेदपुर द्वारा सोमवार को बिरसानगर थाना क्षेत्र के दुखूडीह जंगल में छापेमारी कर अवैध शराब फैक्ट्री का उद्भेदन किया। जिसमें 160 लीटर तैयार अंग्रेजी(जलरीला) शराब, 600 लीटर कच्चा स्प्रीट, लेबल, ढक्कन, कैरेमल, माल्ट इत्यादि बरामद किया गया। हालांकि फैक्ट्री संचालक भागने में फरार हो गया। खबर लिखे जाने तक फैक्ट्री संचालक की तलाश जारी है और विभाग द्वारा नाम का खुलासा नहीं किया गया।

मालूम हो कि पिछले पांच दिनों में यह दूसरी छापेमारी है। इससे पहले भी 13 अगस्त को जुगसलाई थाना क्षेत्र में विभाग ने छापेमारी कर बड़े पैमाने में अवैध शराब बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाली सामग्री बरामद की थी। हालांकि इस छापेमारी में भी संचालक भागने में फरार हो गया।

छापेमारी के दौरान जब्त सामान

अधिकतर छापेमारी में क्यों नहीं पकड़े जाते है संचालक

मालूम की यह पूरा अवैध कारोबार सिंडिकेट के माध्यम से चल रहा है। सिंडिकेट के लोग उत्पाद विभाग में बाबुओं की जीहुजूरी कर उनका खास बने हुए है। जिससे विभाग की हर गतिविधि की जानकारी अवैध शराब कारोबारियों तक पहले पहुंच जाता है और वह फरार हो जाते है। इसलिए अधिकतर छापेमारी में मुख्य अभियुक्त नहीं पकड़ा जाता है। साथ ही यह भी एक कारण है कि इतने बड़े जिले में उत्पाद विभाग के पास संख्याबल की भी कमी है।

दोहरा सकता है जलरीली शराब कांड

मालूम हो कि 30 वर्ष पूर्व 1995 में जमशेदपुर के सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के उरांव बस्ती में जहरीली शराब कांड हुआ था। उस कांड में लगभग 70 लोगों की मौत हो गई थी। इस शराब कांड को लोग आज तक भूल नहीं पाए क्योंकि इस कांड ने कइयों के घर उजाड़ दिए।

सावधान! दुकानों से सोच – समझकर खरीदे शराब

जानकारी के मुताबिक शहर में इतने बड़े पैमाने में बनाए जा रहे अवैध शराब की बिक्री सिर्फ अवैध जगहों या छोटे व्यापारियों को ही नहीं बल्कि सिंडिकेट के माध्यम से अधिकृत दुकानों में भी बेची जा रही है। सोमवार को हुई छापेमारी में सिग्नेचर, नंबर 1, रॉयल स्टैग, रॉयल चैलेंज, ब्लेंडर्स प्राइड, ब्लैक टाइगर आदि ब्रांड का लेबल, स्टीकर और ढक्कन बरामद किया गया। हालांकि शराब दुकानों पर उत्पाद विभाग कड़ी निगरानी रखे हुए है।

60 से 100 रुपए में बिकती है खाली बोतले

सूत्रों के मुताबिक कुछ लोग शराब दुकान से खरीदी हुई शराब को पीकर अच्छे ढंग से खाली की हुई बोतल को वापस शराब दुकान में दे देते है, जिससे दुकानदार उन्हें 60 से 100 रुपए तक देते है। जानकारी के मुताबिक अधिकतर अधिकृत दुकानों में साइकिल के ट्यूब का टुकड़ा दुकानदार रखता है जिससे ओरिजनल बोतल को बगैर किसी नुकसान के आसानी से खोलकर उसमें नकली शराब भरकर वापस काउंटर में सजा दिया जाता है।

दुकान लेने की होड़ में है अवैध कारोबारी

मालूम हो कि कई अवैध शराब कारोबारी दुकान लेने की होड़ में लगे हुए है। कुछ अपने तो कुछ सिंडिकेट के माध्यम से शराब दुकानों के लिए होने वाली लॉटरी में हिस्सा लेंगे ताकि अवैध शराब का कारोबार लाइसेंसी हो जाए और खुलकर बिक्री हो।

टीम में ये थे शामिल

सोमवार को हुई छापेमारी टीम में उत्पाद निरीक्षक प्रेम प्रकाश उरांव, अवर निरीक्षक रामदेव पासवान, ओम प्रकाश, सहायक अवर निरीक्षक शैलेंद्र सिंह, राम हरि महतो शामिल थे।

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