महली समाज के प्रथागत कानून पर एआईएमएए की बैठक

जमशेदपुर | ऑल इंडिया महली आदिवासी एसोसिएशन (एआईएमएए) की दो दिवसीय बैठक का समापन रविवार को निर्मल गेस्ट हाउस में हुआ। इस बैठक में झारखंड, पश्चिम बंगाल से आए लगभग 25 प्रतिनिधि, जिनमें पारगाना, माझी, गोड़ेट आदि पारंपरिक नेतृत्वकर्ता ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बैठक का प्रमुख रूप से महली समाज की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था एवं प्रचलित रिवाजों (प्रथागत कानून) को संकलित कर एक ड्राफ्ट दस्तावेज़ तैयार को लेकर चर्चा किया गया। बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष सूर्य सिंह बेसरा ने महली समाज के सभी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों से आग्रह किया है कि वे अपनी राय, सुझाव और परंपरागत जानकारी उपलब्ध कराएँ, ताकि इस ड्राफ्ट को और अधिक प्रामाणिक एवं व्यापक बनाया जा सके।
महली समाज की मौखिक परंपराओं, प्रथाओं और सामाजिक व्यवस्था को लिखित रूप में दर्ज करना समय की आवश्यकता है
बैठक के दौरान महली समाज की पारंपरिक संस्कृति और जीवन पद्धति से जुड़े कई पहलुओं पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया। साथ ही सभी उपस्थित प्रतिनिधियों ने यह राय दी कि महली समाज की मौखिक परंपराओं, प्रथाओं और सामाजिक व्यवस्था को लिखित रूप में दर्ज करना समय की आवश्यकता है। इसके माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक स्वशासन और परंपरागत कानून की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होगी।
बैठक के प्रमुख चर्चा :
संस्कार एवं अनुष्ठान – जन्म से लेकर विवाह एवं मृत्यु तक के सभी पारंपरिक संस्कारों की समीक्षा।
पर्व त्यौहार - महली समाज के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक त्योहारों का उल्लेख और उनका सामाजिक महत्व।
पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था – महली माझी परगना माहाल ये प्रणाली समाज में ग्रामस्तर पर स्वशासन की भूमिका है।
भाषा एवं संस्कृति – महली भाषा के संरक्षण, संवर्धन और उसके उपयोग पर विस्तृत चर्चा की गई।
धार्मिक विश्वास और पूजा-पद्धति – पारंपरिक उपासना पद्धतियाँ और उनसे जुड़ी आस्थाएँ।
वेशभूषा एवं जीवन शैली – समाज की परंपरागत पोशाक, शिल्पकला और पहनावे का महत्व के बारे में भी निर्णय लिया गया।
अन्य प्रचलित रीति-रिवाज – सामाजिक जीवन में प्रचलित रिवायती मान्यताएँ, परस्पर व्यवहार और सामुदायिक नियम।



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