लगता है नजर लग गया है टाटानगर को! पार्किंग के बाद अब आरपीएफ विवाद में…

  • 20 अगस्त को भी सिर्फ एक बिरयानी की दुकान को थाना प्रभारी ने हटाया, बाकी दुकानों को अनदेखा कर दिया।
  • बाल मजदूरी के नियम और चलाए जा रहे अभियान सिर्फ कागजों पर
  • जल्द मामले पर करवाई नहीं हुई तो रेल मंत्री और आरपीएफ डीजी से मिलेंगे – मिलन सिन्हा
टाटानगर आरपीएफ पोस्ट में बच्चे से चाय लेते अधिकारी।

जमशेदपुर|चक्रधरपुर रेल मंडल अंतर्गत टाटानगर रेल पार्किंग के बाद अब टाटानगर आरपीएफ विवाद में आ गया है। एक समाचार पत्र से मिली जानकारी के अनुसार टाटानगर आरपीएफ इंस्पेक्टर राकेश मोहन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे है। सोशल मीडिया पर अशोक गुप्ता द्वारा पोस्ट कर लिखा गया है कि आरपीएफ थाना प्रभारी अवैध जगह पर अस्थाई दुकान लगाने को लेकर एक अच्छी खासी रकम की वसूली करते है और जो सेवा नहीं दे पाता उससे दुकान हटाने के लिए बोलते है। लोग चर्चा कर रहे है कि टाटानगर को नजर लग गया है, पहले पार्किंग अब आरपीएफ।

वसूली के लिए है लोग

समाचार पत्र के अनुसार अशोक गुप्ता द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में लिखा गया है कि इंस्पेक्टर के करीबी मंटू यादव और वीके यादव दुकानदारों से पैसे की उगाही करते है और नहीं देने पर दुकान को हटा दिया जाता है। हालांकि अविनाश यादव का भी नाम काफी चर्चा में है।

20 अगस्त को भी कुछ ऐसा ही हुआ

उक्त मामले की जानकारी लेने जब टूडेज वॉयस की टीम स्टेशन चाईबासा बस स्टैंड पहुंची तो मालूम हुआ कि 20 अगस्त को आरपीएफ थाना प्रभारी खुद जाकर सिर्फ बिरयानी की दुकान को 5 मिनिट में हटा देने का आदेश दे दिया। दुकान चला रहा युवक जब आरपीएफ पोस्ट जा कर अधिकारियों से पूछा कि “सर, दुकान सिर्फ हम हटाएंगे की और भी लगे 15-20 दुकान को हटाने का आपने आदेश दिया है?” तो अधिकारियों ने उस युवक को तुरंत पोस्ट में बैठा लिया।

आरपीएफ पोस्ट के सामने चलती रही दुकानें, बागबेड़ा टीओपी के पास से दुकानदारों को स्कॉर्पियो में भरकर लाया गया आरपीएफ पोस्ट

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरपीएफ पोस्ट और रेल अधीक्षक कार्यालय के ठीक सामने खुले आम अवैध रूप से 15- 20 दुकानों का संचालन किया जा रहा है। उस जगह पर आरपीएफ प्रभारी सिर्फ एक बिरयानी वाले को दुकान हटाने का आदेश देकर आते है। इसके बाद अपने कार्यालय के सामने के अन्य दुकानदारों को नहीं बल्कि कुछ ही दूरी पर बागबेड़ा टीओपी के पास लगे दुकान संचालकों को स्कॉर्पियो में भरकर आरपीएफ पोस्ट लाया जाता है। हालांकि, कुछ घंटों के बाद सभी को छोड़ दिया गया। पूरे क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि सेवा बिना कुछ भी संभव नहीं।

बाल मजदूरी के नियम सिर्फ कागजों पर

मालूम हो कि टीम जब उपरोक्त मामले की जानकारी ले रही थी तो कुछ लोगों ने टीम के सदस्यों को कुछ तस्वीरें और वीडियो उपलब्ध करवाई। जिसमें साफ देखा जा सकता है कि 20 अगस्त को आरपीएफ पोस्ट में बाल मजदूरी चरम सीमा पर है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पोस्ट ने लाल टी-शर्ट पहना हुआ बच्चा चाय की केतली में पदाधिकारियों को चाय परोसता है और पदाधिकारी भी उसे समझाने या उसे वापस भेजने के बजाय चाय पीने लगते है। मालूम हो कि सरकार द्वारा बाल मजदूरी के कई नियम बनाए हुए है। लेकिन इन सब नियमों को ताक पर रख अधिकारियों द्वारा बाल मजदूरी करवाना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे यह पता चला है कि बाल मजदूरी के लिए बनाए गए नियम और चलाए जा रहे अभियान सिर्फ कागजों पर ही है।

मिलन सिन्हा, प्रभारी भाजपा।

दुकानदारों से वसूली, बाल मजदूरी और अनियमिता पर अगर तुरंत करवाई नहीं हुई तो आरपीएफ डीजी और रेल मंत्री से इसकी शिकायत करेंगे। मिलन सिन्हा, प्रभारी, सरायकेला-खरसावां, भाजपा।

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