हंगामे के बीच अखिल भारतीय तेली साहू महासभा के अध्यक्ष बने द्वारिका प्रसाद, राकेश साहू समाज से निष्कासित
- वित्तीय अनियमितता एवं आय-व्यय का हिसाब नहीं देने के कारण राकेश साहू की आजीवन सदस्यता समाप्त कर समाज से निष्कासित किया गया।

जमशेदपुर | अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा की रविवार को एग्रिको क्लब हाउस में आमसभा हंगामेदार रही। महासभा में एक गुट की ओर से द्वारिका प्रसाद को सर्वसम्मति से अध्यक्ष बताया गया वहीं दूसरे गुट की तरफ से राकेश साहू को एक बार फिर अध्यक्ष चुने जाने की बात कही गई। प्रथम गुट की ओर से कहा गया कि 171 सदस्य उपस्थित थे, जिसमें 31 सदस्य चुनाव कराने के पक्ष में थे. जबकि 140 सदस्य सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुने जाने के पक्ष में थे. जबकि दूसरे गुट ने कहा कि विनोद गुप्ता ने अध्यक्ष के लिए द्वारिका प्रसाद का नाम प्रस्तावित किया. जिसका सभी ने समर्थन किया।
समाज के पैसे का कोई हिसाब नहीं
ऑडिट रिपोर्ट में बैंक ऑफ इंडिया हाता शाखा के खाते का जिक्र है। यह खाता कब खोला गया है? इसमें बैलेंस नहीं बताया गया है। पर्यवेक्षक कमेटी की ओर से बैंक स्टेटमेंट मांगा गया तो वह भी उपलब्ध नहीं कराया गया। समाज का पैसा कहां गया, इसका कोई हिसाब नहीं। समाज के रजिस्टर्ड ऑफिस का पता गलत लिखा गया है। एक ही तारीख में पांच साल की ऑडिट रिपोर्ट पर हस्ताक्षर किया गया। जबकि यह प्रत्येक वर्ष होना चाहिए। यह भी कहा गया कि राकेश साहू ने अपना आजीवन सदस्यता क्रमांक 85 दिखाया है। जबकि सदस्यता क्रमांक 85 संतोष गुप्ता का है। यह भी कहा गया कि समाज का कोई भी सदस्य जो किसी एक पद पर लगातार दो कार्यकाल अथवा छह वर्षों तक पदस्थ है, वह भविष्य में पुनः उसी पद का उम्मीदवार नहीं बन सकता, जबकि राकेश साहू छह वर्षों से एक ही पद पर हैं। इन आरोपों के संबंध में राकेश साहू को बार-बार अपना पक्ष रखने को कहा गया लेकिन वे कमेटी के सामने पेश नहीं हुए, इसलिए सर्वसम्मति से राकेश साहू की आजीवन सदस्यता समाप्त कर दी गयी।

राकेश साहू की आजीवन सदस्यता समाप्त, समाज से निष्कासित
इस दौरान कई आरोप लगाते हुए राकेश साहू की आजीवन सदस्यता समाप्त कर दी गयी। पूर्व कमेटी के कार्यवाहक अध्यक्ष राकेश साहू ने वर्ष 2020 से 2026 तक के कार्यकाल का आय-व्यय प्रस्तुत किया। जिस पर पर्यवेक्षक कमेटी द्वारा असहमति जतायी गयी। कहा गया कि राकेश साहू ने समाज का चंदा व्यक्तिगत खाते में लिया। वे आय-व्यय का उचित लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं कर पाये। फिक्स्ड डिपॉजिट बिना कारण तोड़ दिया। तीन साल बाद अकाउंट में केवल मूलधन जमा किया गया। ब्याज की राशि को निजी कार्यों में लगाया। राकेश साहू द्वारा पेश किये गये ऑडिट रिपोर्ट में 18 अंकों का यूडीआइएन नंबर नहीं है, जबकि आइसीएआइ के नियम के अनुसार सीए की किसी भी ऑडिट रिपोर्ट पर 18 अंकों का यूडीआइएन नंबर अनिवार्य होता है।
ये थे उपस्थित
मौके पर पर्यवेक्षक समिति के अध्यक्ष हरिहर प्रसाद, रंगनाथन साहू, शेखर कुमार, अनिल कुमार साहू, राज किशोर प्रसाद, कुंदन लाल गुप्ता, शशि कांत महाराज, विनोद गुप्ता, डॉ ऋषिकेश, धर्मेंद्र कुमार, प्रमोद साहू, दिलीप कुमार गुप्ता, दूसरे गुट से पप्पू साहू, सुरेश कुमार, शिवलोचन साहू, रंजीत कुमार, अशोक साहू, प्रवीण साहू, सागर साहू, प्रह्लाद साहू, शैलेंद्र कुमार, पूजा साहू, राजेश प्रसाद, भोला प्रसाद, संजय साहू, कमलेश साहू, रेणु कुमारी, मनोज साहू, अशोक साहू, प्रवीण कुमारव अन्य मौजूद रहे।
आरोप लगाया गया है तो उसका प्रूफ दे। फिक्स डिपोजिट तोड़ा नहीं गया है। यूडीआइएन नंबर के लिए सीए से बात की जा सकती है। बैंक का पासबुक दे दिया गया है। सारे आरोप निराधार।
राकेश साहू



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