उपायुक्त ने की स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा, कुष्ठ आश्रम बाराद्वारी में 24-30 मई तक लगेगा समर कैम्प

  • स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने पर दिया गया बल
  • ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव एवं कुपोषण प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के दिए निर्देश
  • विभिन्न गतिविधियों में  भाग लेंगे बच्चे, पोस्टर का हुआ विमोचन
पोस्टर का विमोचन करते उपायुक्त व अन्य

जमशेदपुर | समाहरणालय सभागार में बुधवार को उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की मासिक समीक्षात्मक बैठक आयोजित हुई। बैठक में प्रोजेक्ट उल्लास अंतर्गत मिर्गी रोगियों की पहचान एवं उपचार, डायलिसिस सेवा, आईसीयू एवं शिशु केयर यूनिट की व्यवस्था, कुपोषण उपचार केंद्रों की स्थिति, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, ममता वाहन, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम सहित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान उपायुक्त ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य केवल उपचार तक सीमित नहीं, बल्कि आमजनों में भरोसा और सहज पहुंच सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए सेवाओं को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी एवं जनोन्मुख बनाया जाए। साथ ही प्रत्येक माह प्रखंड स्तर पर अधीनस्थ कर्मियों के साथ नियमित समीक्षा बैठक आयोजित करने को कहा।

प्रोजेक्ट उल्लास की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने नियमित स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से मिर्गी रोगियों की पहचान एवं उपचार को और गति देने तथा मरीजों के सतत फॉलोअप पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। सदर अस्पताल एवं घाटशिला अनुमंडल अस्पताल में संचालित डायलिसिस सेवाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में यह सेवा बाधित नहीं होनी चाहिए। मशीनों के मेंटनेंस एवं सर्विसिंग कार्य को न्यूनतम समय में पूर्ण कर मरीजों को निर्बाध सेवा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

शिशु केयर यूनिट एवं कुपोषण उपचार केंद्रों की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने नवजात एवं कुपोषित बच्चों के समुचित उपचार और देखभाल सुनिश्चित करने पर बल दिया। बहरागोड़ा, घाटशिला, मुसाबनी, पोटका एवं टेल्को स्थित एमटीसी में अपेक्षाकृत कम बेड ऑक्यूपेंसी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को महिला एवं बाल विकास विभाग, सेविका एवं सहिया के साथ समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को उपचार से जोड़ने का निर्देश दिया। साथ ही अभिभावकों को एमटीसी में उपचार एवं ठहराव के लाभों के प्रति जागरूक करने को कहा।

टीकाकरण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति हेतु घर-घर सत्यापन अभियान चलाने तथा वंचित परिवारों को जागरूक कर टीकाकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों एवं स्वास्थ्य उपकेंद्रों में स्वास्थ्य कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावी रूप से संचालित हो सकें।

संस्थागत प्रसव को लेकर उपायुक्त ने जिले में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। होम डिलीवरी के मामलों में कारणों का विश्लेषण कर ठोस समाधान निकालने तथा क्षेत्र स्तर पर जागरूकता बढ़ाने को कहा।

बैठक में डेंगू एवं मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने, फॉगिंग अभियान, साफ-सफाई एवं जनजागरूकता गतिविधियों को प्रभावी रूप से संचालित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, टीबी उन्मूलन अभियान एवं एनीमिया मुक्त भारत अभियान की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों में एनीमिया जांच एवं गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग गतिविधियों को और मजबूत करने पर बल दिया। उन्होंने कार्य में लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया।

ये थे उपस्थित

बैठक में सिविल सर्जन डॉ साहिर पाल, एसीएमओ डॉ अजय सिन्हा, डॉ मृत्युंजय धावड़िया सहित सभी एमओआईसी, डीपीसी, डीडीएम, बीएएम, बीपीएम, बीडीएम एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

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